ENTERTAINMENT: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की फौज के नजरिए से फिल्माई गई अमेजन प्राइम ओरिजिनल की वेब सीरीज ‘द फॉरगॉटन आर्मी: आजादी के लिए’ में आजाद हिंद फौज (आईएनए) का अपने देश को आजाद करवाने का जज्बा आपके रोंगटे खड़े कर सकता है. द्वितीय विश्वयुद्ध के कालखंड में लिखी गई आजाद हिंद फौज की कहानी से ज्यादातर हिंदुस्तानी अनभिज्ञ हैं. इस फौज का उदय और मर मिटने की कहानी को भारतीयों तक पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी समझकर फिल्म निर्माता और निर्देशक कबीर खान ने इस वेब सीरीज का निर्माण किया है.
सीरीज के पहले एपिसोड की शुरुआत आईएनए के उस जवान से होती है जो अब बूढ़ा हो चुका है और हिंदुस्तान की आजादी के लगभग 48 साल बाद सिंगापुर आया है. सिंगापुर को ही आईएनए का उद्गम स्थल माना जाता है क्योंकि यहीं पर बहादुरी से लड़ने के बावजूद इंडियन ब्रिटिश आर्मी के 90 हजार सिपाहियों ने अंग्रेजी सरकार की बेवकूफियों की वजह से जापान के सिर्फ 30 हजार सिपाहियों के सामने घुटने टेक दिए थे.

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जापानी सरकार अंग्रेजों को अपना दुश्मन जबकि भारतीयों को अपना दोस्त समझती थी. कबीर खान की इस वेब सीरीज के अनुसार जापानी सरकार महात्मा गांधी की बहुत इज्जत करती थी क्योंकि गांधी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे. जापानी सैनिक बंदी बनाए गए ब्रिटिश इंडियन आर्मी के भारतीय सैनिकों को भरोसा दिलाते हैं कि वह भारत को आजाद कराने में उनकी मदद करेंगे. आईएनए के सैनिक जापानी फौज का साथ पाकर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हैं और हार जाते हैं. भारत की आजादी का श्रेय इसलिए आईएनए को नहीं जाता.

इस सीरीज को देखने के लिए उसी तरह के धैर्य की जरूरत है जैसे किसी भी क्लासिक सीरीज के लिए होती है. कहानी दो समयों में चल रही होती है तो शुरुआत में मामा भांजे की बातचीत के दृश्य थोड़े अटपटे लगते हैं. लेकिन कहानी फिर भी आपको अगले एपीसोड के लिए प्रेरित करती रहती है. कबीर खान ने अपने चिर परिचित अंदाज में सीरीज को फिल्माया है. सनी कौशल, शर्वरी, रोहित चौधरी, टीजे भानु आदि पर्दे पर एक मंजे हुए कलाकार की तरह पेश आए। सीरीज की गति, दृश्य और कहानी दर्शकों को बांधे रखने में कारगर है.


