रांची के एक प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ को मनी लांड्रिंग मामले में फंसाने का भय दिखाकर डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के नाम पर 30 लाख रुपये की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। इस सनसनीखेज साइबर क्राइम का मास्टरमाइंड योगेश सिंह सिसोदिया को झारखंड सीआईडी साइबर क्राइम थाना की टीम ने राजस्थान के सांगानेर से गिरफ्तार कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी जयपुर पुलिस के सहयोग से हुई।
👉 ईडी के नाम पर धमकाकर डॉक्टर से वसूले 30 लाख
अप्रैल 2024 में गिरोह के सदस्यों ने डॉक्टर को फोन कर खुद को ईडी अधिकारी बताते हुए मनी लांड्रिंग केस दर्ज होने की कहानी गढ़ी। उन्हें धमकाया गया कि जल्द ही उनकी गिरफ्तारी हो सकती है।
डर और दबाव के कारण डॉक्टर से उनके बैंक खाते की जानकारी ली गई और कई खातों में 30 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। इसके बाद 22 अप्रैल 2024 को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
📱 ठगी में इस्तेमाल मोबाइल और सामान जब्त
पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी में उपयोग किए गए मोबाइल और अन्य सामान बरामद किए हैं। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल की जानकारी के अनुसार आरोपी के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में कम से कम 10 साइबर धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं।
पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें ठगी का पैसा ट्रांसफर हुआ था। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल किया, जिसमें कुछ रकम देकर खाते धारकों के पासबुक, एटीएम और चेक उपयोग किए जाते हैं।
🚨 राजस्थान से संचालित हो रहा था साइबर सिंडिकेट
जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा साइबर ठगी रैकेट राजस्थान से संचालित हो रहा था। गिरोह कई राज्यों के लोगों को केंद्रीय जांच एजेंसियों के नाम पर डराकर बड़ी ठगी करता था।
सीआईडी का मानना है कि मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी से इस नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
⚠️ लोगों के लिए जरूरी सलाह
- किसी भी कॉल पर खुद को ईडी/सीबीआई बताने वाले से सावधान रहें
- किसी भी परिस्थिति में बैंक डिटेल साझा न करें
- डराने या डिजिटल अरेस्ट जैसी बातों पर विश्वास न करें
- तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें

