रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित चेरी मनातू के सेंट्रल यूनिवर्सिटी में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की टीम ने अचानक कैंपस में दबिश दी। आधा दर्जन से अधिक वाहनों में पहुंची CBI की टीम ने यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचते ही जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी।
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई पुराने वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर की जा रही है। CBI की टीम ने यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की।
📌 किन मामलों की हो रही है जांच?
CBI सूत्रों के मुताबिक, जांच मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर केंद्रित है:
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🏢 भवन निर्माण फंड के आवंटन में अनियमितता
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👨🏫 नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप
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📂 पुराने वित्तीय रिकॉर्ड और फाइलों की समीक्षा
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💰 फंड उपयोग और खर्च का ऑडिट मिलान
बताया जा रहा है कि यूनिवर्सिटी में भवन निर्माण के लिए आवंटित राशि के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके साथ ही कुछ नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी के आरोप भी सामने आए हैं।
📱 मोबाइल जब्त, फाइलें खंगाल रही टीम
CBI की टीम जैसे ही यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक कार्यालय पहुंची, वहां मौजूद सभी कर्मियों के मोबाइल फोन अपने पास जमा करवा लिए गए। इसके बाद अधिकारियों को अपने-अपने स्थान पर बैठने को कहा गया।
यूनिवर्सिटी के दूसरे तल स्थित कार्यालय में दर्जनों महत्वपूर्ण फाइलों को जांच एजेंसी द्वारा खंगाला जा रहा है। दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है, ताकि किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता का पता लगाया जा सके।
🎓 छात्रों में चर्चा, कैंपस में बढ़ी हलचल
जब CBI की टीम कैंपस पहुंची, उस समय छात्र अपने-अपने क्लासरूम में पढ़ाई कर रहे थे। जैसे ही टीम के पहुंचने की खबर फैली, पूरे कैंपस में हलचल मच गई। हालांकि, शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहीं।
छात्रों के बीच इस कार्रवाई को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कई छात्रों ने पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
🔎 पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब सेंट्रल यूनिवर्सिटी में CBI की टीम ने दबिश दी हो। इससे पहले भी जांच एजेंसी यहां पहुंच चुकी है। हालांकि, उस समय की जांच का अंतिम परिणाम सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया था।
इस बार की कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि जांच एक साथ कई बिंदुओं पर की जा रही है।
📊 क्या हो सकता है आगे?
विशेषज्ञों का मानना है कि:
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यदि दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों पर FIR दर्ज हो सकती है।
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नियुक्तियों की प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा हो सकती है।
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वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक ऑडिट भी कराई जा सकती है।
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केंद्र सरकार स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई संभव है।
❓ क्या कहती है यूनिवर्सिटी प्रशासन?
खबर लिखे जाने तक यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। संभावना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

