मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच हालात और गंभीर हो गए हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र के 8 अहम पुलों को अपनी संभावित हिट लिस्ट में शामिल किया है। यह कदम अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के B1 ब्रिज पर किए गए हमले के बाद सामने आया है।
B1 ब्रिज पर हमला, बढ़ा तनाव
अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सबसे ऊंचे B1 ब्रिज को निशाना बनाया गया। यह पुल तेहरान को कराज से जोड़ने के लिए बनाया जा रहा था।
हमले में पुल को भारी नुकसान पहुंचा और कम से कम 8 लोगों की मौत जबकि 90 से अधिक लोग घायल हो गए।
किन पुलों को बनाया गया निशाना?
रिपोर्ट्स के अनुसार IRGC ने जिन पुलों को संभावित टारगेट बनाया है, उनमें शामिल हैं—
- कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह ब्रिज
- यूएई के शेख जायद ब्रिज, अल मकता ब्रिज और शेख खलीफा ब्रिज
- सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉजवे
- जॉर्डन के किंग हुसैन ब्रिज, दामिया ब्रिज और अब्दौन ब्रिज
इन पुलों का रणनीतिक महत्व काफी बड़ा है, क्योंकि ये खाड़ी देशों की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के बाद कड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता है, तो और भी विनाशकारी कार्रवाई की जा सकती है।
ईरान का जवाब
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले को नागरिक ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि इससे ईरान झुकने वाला नहीं है।
उन्होंने इसे दुश्मन की हताशा और मनोबल गिरने का संकेत बताया।
बढ़ता खतरा, वैश्विक चिंता
मिडिल ईस्ट में यह संघर्ष अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। खाड़ी देशों तक बढ़ते तनाव से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।
यदि IRGC इन पुलों पर हमला करता है, तो इसका असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई पर भी पड़ सकता है।

