नगर परिषद के अकाउंटेंट के घर EOU का छापा, थार से लेकर करोड़ों की संपत्ति देख अधिकारी भी चौंके!

हाजीपुर: बिहार के वैशाली जिले में गुरुवार को आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हाजीपुर नगर परिषद के अकाउंटेंट मनीष कुमार के दो ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में की गई इस कार्रवाई के दौरान टीम को सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, जमीन-जायदाद के कागजात और एक थार गाड़ी सहित कई महत्वपूर्ण सामान मिले हैं।

आर्थिक अपराध इकाई की इस कार्रवाई से हाजीपुर में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए मनीष कुमार को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया है।

सुबह 8 बजे पहुंची EOU की टीम

जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई की टीम गुरुवार सुबह करीब 8 बजे हाजीपुर पहुंची। टीम ने विशेष निगरानी न्यायालय, मुजफ्फरपुर से प्राप्त तलाशी वारंट के आधार पर नगर परिषद के अकाउंटेंट मनीष कुमार के दो अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की।

जैसे ही कार्रवाई की खबर फैली, नगर परिषद और आसपास के इलाके में चर्चा का माहौल बन गया।

छापेमारी में मिले लाखों के आभूषण और अहम दस्तावेज

प्रारंभिक जांच में EOU की टीम को आरोपी अकाउंटेंट के ठिकानों से लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण, चांदी के सिक्के, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज, निवेश संबंधी कागजात और कई जमीनों के दस्तावेज मिले हैं।

इसके अलावा जांच के दौरान एक आलीशान मकान और महंगी थार गाड़ी का भी पता चला है। टीम बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों के स्रोत की जांच कर रही है।

भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद दर्ज हुआ केस

सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक अपराध इकाई को मनीष कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। शिकायत के आधार पर EOU ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर केस संख्या 10/26 दर्ज किया गया और बाद में मुजफ्फरपुर स्थित निगरानी की विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया।

आय से 208 प्रतिशत अधिक संपत्ति का दावा

EOU की प्राथमिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार मनीष कुमार के पास लगभग 2 करोड़ 2 लाख 30 हजार 500 रुपये की ऐसी संपत्ति के साक्ष्य मिले हैं, जो उनकी ज्ञात आय के मुकाबले करीब 208.57 प्रतिशत अधिक है।

यानी उनके पास मौजूद संपत्ति उनकी घोषित और वैध आय के मुकाबले कई गुना ज्यादा पाई गई है। यही वजह है कि मामले को गंभीर आर्थिक अपराध के रूप में देखा जा रहा है।

जांच के बाद बढ़ सकती हैं मुश्किलें

अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत जांच की जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

फिलहाल EOU की टीम सभी वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अवैध संपत्ति किस प्रकार अर्जित की गई।

भ्रष्टाचार पर लगातार सख्त हो रही एजेंसियां

बिहार में हाल के वर्षों में आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में आर्थिक अपराध इकाई लगातार सक्रिय नजर आ रही है। सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई कर एजेंसी अवैध संपत्ति के मामलों की जांच कर रही है।

हाजीपुर में हुई यह कार्रवाई भी उसी अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।