पटना। बिहार सरकार ने जमीन की खरीद-बिक्री और निबंधन प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्यभर में जमीन के न्यूनतम सरकारी मूल्य (सर्किल रेट) में व्यापक संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। जिला गजट में जारी अधिसूचना के अनुसार अब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जमीन की सरकारी दरें बढ़ा दी गई हैं।
सरकार का दावा है कि इस कदम से जमीन रजिस्ट्री में पारदर्शिता आएगी, फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और किसानों को भूमि अधिग्रहण के दौरान अधिक मुआवजा मिल सकेगा।
शहरों में दोगुना तक बढ़ा सर्किल रेट
प्रभारी जिला निबंधक पदाधिकारी कुणाल गोस्वामी ने बताया कि नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में जमीन के सरकारी न्यूनतम मूल्य में दो गुना तक वृद्धि की गई है। वहीं ग्रामीण इलाकों में सर्किल रेट को 1.6 गुना तक बढ़ाया गया है।
सरकार ने शहरी, ग्रामीण और शहरी सीमा से सटे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मूल्यांकन दरें तय की हैं, जिससे जमीन की वास्तविक बाजार कीमत के करीब सरकारी मूल्यांकन किया जा सके।
रजिस्ट्री कराने पर बढ़ेगा खर्च
सर्किल रेट बढ़ने का सीधा असर जमीन की रजिस्ट्री पर पड़ने वाला है। अब स्टांप ड्यूटी और निबंधन शुल्क की गणना नए बढ़े हुए सरकारी मूल्य के आधार पर की जाएगी। ऐसे में जमीन खरीदने वालों को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान वास्तविक कीमत दिखाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और कम मूल्य दिखाकर टैक्स बचाने की कोशिशों पर रोक लगेगी।
बिहार सरकार ने जमीन संबंधी विवादों और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए ई-निबंधन प्रक्रिया को और सख्त बना दिया है। अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री से पहले ई-निबंधन पोर्टल पर अंचल, मौजा, खाता, खेसरा, चौहद्दी और जमाबंदी धारक का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करना अनिवार्य होगा।
पोर्टल पर आवेदन जमा होते ही संबंधित अंचल अधिकारी के पास जांच के लिए भेजा जाएगा। सरकार ने इसके लिए 10 दिनों की समय सीमा निर्धारित की है। अंचलाधिकारी को इस अवधि के भीतर अपनी रिपोर्ट या आपत्ति दर्ज करनी होगी।
यदि 10 दिनों के भीतर कोई आपत्ति दर्ज नहीं होती है, तो आवेदन स्वतः रजिस्ट्री कार्यालय को अग्रेषित कर दिया जाएगा। इसकी सूचना आवेदक को एसएमएस के माध्यम से भेजी जाएगी।
दान-पत्र और संपत्ति हस्तांतरण पर भी नई दरें लागू
नई अधिसूचना के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में भूमि अथवा संपत्ति के निबंधन पर 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क लागू होगा। हालांकि यदि संपत्ति का हस्तांतरण पुरुष से महिला के नाम किया जाता है, तो 6.6 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देय होगी।
यही नियम दान-पत्र (Gift Deed) पर भी लागू होगा। यदि दान-पत्र के माध्यम से संपत्ति किसी महिला के नाम हस्तांतरित की जाती है, तो 6.6 प्रतिशत स्टांप शुल्क लगेगा, जबकि अन्य सभी मामलों में 7 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी होगी।
आम लोगों को मिलेंगे कई बड़े फायदे
निबंधन विभाग के अनुसार, नई व्यवस्था से आम लोगों को कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। अब तक सरकारी सर्किल रेट बाजार मूल्य से काफी कम होने के कारण लोगों को अपनी संपत्ति के बदले पर्याप्त बैंक ऋण प्राप्त करने में परेशानी होती थी।
सरकारी दरों में बढ़ोतरी के बाद बैंक भूमि के मूल्यांकन के आधार पर अधिक कृषि ऋण, व्यापार ऋण और होम लोन स्वीकृत कर सकेंगे।
इसके अलावा, भविष्य में यदि किसी हाईवे, बाइपास या अन्य सरकारी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण किया जाता है, तो किसानों और रैयतों को बढ़े हुए सरकारी मूल्य के आधार पर अधिक मुआवजा प्राप्त होगा।
भू-माफियाओं और टैक्स चोरी पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच अंतर कम होने से भू-माफियाओं द्वारा कम कीमत दिखाकर की जाने वाली टैक्स चोरी पर अंकुश लगेगा। साथ ही, अंचलाधिकारी द्वारा 10 दिनों के भीतर की जाने वाली ऑनलाइन जांच से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाली रजिस्ट्री और दीवानी विवादों में भी भारी कमी आएगी।
लोग अपनी जमीन की नई सरकारी दरों की जानकारी विभाग के भूमि जानकारी पोर्टल पर ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
प्रमुख बाजारों और हाईवे किनारे जमीनों पर बड़ा असर
नई व्यवस्था का असर सुपौल जिले समेत कई क्षेत्रों में साफ दिखाई देगा। राघोपुर, गणपतगंज और अन्य प्रमुख बाजारों के व्यावसायिक भूखंडों के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग-27, राष्ट्रीय राजमार्ग-106 तथा राज्य राजमार्गों के किनारे स्थित जमीनों के सर्किल रेट में भौगोलिक स्थिति के आधार पर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है।
इससे इन क्षेत्रों की जमीनों की सरकारी कीमत पहले की तुलना में काफी बढ़ सकती है।
कितना देना होगा स्टांप शुल्क?
नई अधिसूचना के अनुसार बिहार में भूमि अथवा संपत्ति के निबंधन के लिए सामान्य स्टांप शुल्क 7 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।
नई स्टांप ड्यूटी दरें
- सामान्य संपत्ति निबंधन : 7%
- पुरुष से महिला के नाम संपत्ति अंतरण : 6.6%
- निबंधन शुल्क की गणना नए सर्किल रेट के आधार पर
इस बदलाव के बाद संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े सभी दस्तावेजों का मूल्यांकन भी नई दरों के अनुसार किया जाएगा।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
राज्य सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य भूमि रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, राजस्व संग्रह बढ़ाना और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को उचित मुआवजा सुनिश्चित करना है।
साथ ही, जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी मूल्यांकन के बीच मौजूद बड़े अंतर को कम करने की भी कोशिश की गई है।
निष्कर्ष
बिहार सरकार की नई भूमि नीति राज्य के रियल एस्टेट और जमीन कारोबार पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है। जहां एक ओर जमीन खरीदने वालों का खर्च बढ़ेगा, वहीं किसानों और भूमि मालिकों को भविष्य में अधिक मुआवजा मिलने की संभावना भी बढ़ेगी। आने वाले दिनों में इस फैसले का असर जमीन बाजार और संपत्ति लेनदेन पर साफ दिखाई देगा।