420 किमी स्केटिंग कांवड़ यात्रा: बिहार के युवाओं का अनोखा जुनून, ‘हर-हर महादेव’ के साथ देवघर की ओर सफर

सावन के पवित्र महीने में जहां लाखों श्रद्धालु पैदल, साइकिल या कांवड़ लेकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए निकलते हैं, वहीं बिहार के कुछ युवाओं ने आस्था को एक अनोखे अंदाज में पेश किया है। गेरुआ वस्त्र, पीठ पर तिरंगा, हाथ में भोले का ध्वज और पैरों में स्केट्स—यह दृश्य इन दिनों हाइवे पर लोगों को ठहरने पर मजबूर कर रहा है।

करीब 420 किलोमीटर लंबी यह अनोखी कांवड़ यात्रा बिहार के समस्तीपुर, मोतिहारी और वैशाली के युवाओं द्वारा की जा रही है, जिनकी मंजिल है Baidyanath Dham। ये युवा स्केटिंग करते हुए देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे।

स्केटिंग के जरिए आस्था का प्रदर्शन

इस अनोखी यात्रा की शुरुआत समस्तीपुर के उजियारपुर निवासी शशि कुमार गोस्वामी के एक विचार से हुई। शशि खुद स्केटिंग के शौकीन हैं और सोशल मीडिया के जरिए अलग-अलग जिलों के युवाओं से जुड़े। बातचीत के दौरान सभी ने मिलकर फैसला लिया कि इस बार सावन में बाबा धाम की यात्रा कुछ अलग तरीके से की जाएगी—स्केटिंग करते हुए।

इसके बाद समस्तीपुर, मोतिहारी और वैशाली के करीब दर्जनभर युवा एकजुट हुए और बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लेकर यात्रा शुरू कर दी।

30 जुलाई से शुरू हुआ सफर

यात्रा की शुरुआत 30 जुलाई को समस्तीपुर के एक मंदिर से हुई।

पहले दिन टोली बेगूसराय पहुंची

खटोपुर शिव मंदिर में रात्रि विश्राम किया

अगले दिन पूजा-अर्चना के बाद फिर स्केटिंग करते हुए आगे बढ़े

युवाओं का लक्ष्य 4 अगस्त तक देवघर पहुंचना है, जहां वे सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगे।

साथ में पूरा इंतजाम

420 किलोमीटर की इस चुनौतीपूर्ण यात्रा को आसान बनाने के लिए युवाओं ने पूरी तैयारी की है:

दो बाइक आगे-पीछे सुरक्षा के लिए चल रही हैं

एक साइकिल पर खाने-पीने और जरूरी सामान रखा गया है

थकान या चोट लगने पर साथी तुरंत मदद करते हैं

हाइवे पर स्केटिंग करना आसान नहीं है। कई बार संतुलन बिगड़ता है और गिरने की स्थिति भी बनती है, लेकिन युवाओं का कहना है कि बाबा भोलेनाथ की भक्ति उन्हें हर बार संभाल लेती है।

आस्था के साथ जुनून

इन युवाओं के लिए यह यात्रा सिर्फ रोमांच नहीं, बल्कि गहरी आस्था का प्रतीक है।

उनका कहना है कि वे इस अनोखी यात्रा के जरिए न सिर्फ भक्ति का संदेश देना चाहते हैं, बल्कि सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अपनी पहचान भी बनाना चाहते हैं, ताकि भविष्य में जरूरतमंदों की मदद कर सकें।

लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी यात्रा

गेरुआ वस्त्र, तिरंगा और स्केटिंग करते श्रद्धालुओं का यह अनोखा रूप हाइवे पर रोज देखने को नहीं मिलता। यही वजह है कि जहां-जहां यह टोली गुजरती है, वहां लोग रुककर उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाने लगते हैं।

सावन में लाखों श्रद्धालु बाबा धाम पहुंचते हैं, लेकिन स्केटिंग करते हुए 420 किलोमीटर की यात्रा करने वाली यह टोली अपनी अलग पहचान बना रही है।

निष्कर्ष

यह अनोखी कांवड़ यात्रा बताती है कि आस्था के साथ अगर जुनून जुड़ जाए, तो हर रास्ता खास बन जाता है। बिहार के इन युवाओं ने भक्ति को एक नया रूप देकर यह साबित कर दिया है कि श्रद्धा की कोई सीमा नहीं होती।