देश के कई हिस्सों में मानसून ने विकराल रूप ले लिया है। गुजरात से लेकर केरल तक भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। India Meteorological Department (IMD) ने कई राज्यों के लिए रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
सूरत में रिकॉर्डतोड़ बारिश, बाढ़ जैसे हालात
गुजरात के Surat में पिछले 24 घंटों के भीतर 24 इंच बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन की सबसे भारी बारिश में से एक है। इसके अलावा राज्य के 12 अन्य इलाकों में 10 इंच से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई निचले इलाकों में पानी भर गया है और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। सड़कों पर जलभराव के कारण यातायात बाधित हो गया है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
केरल में लैंडस्लाइड से 4 की मौत
दक्षिण भारत के Kerala में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण Idukki और Kottayam जिलों में अलग-अलग स्थानों पर भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुईं, जिनमें 4 लोगों की मौत हो गई। राहत और बचाव दल मौके पर मौजूद हैं, जबकि मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।
18 राज्यों में मौसम विभाग का अलर्ट
IMD ने स्थिति को देखते हुए कई राज्यों के लिए अलग-अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं:
रेड अलर्ट: गुजरात और केरल के कई जिले
ऑरेंज अलर्ट: पूर्वी राजस्थान, मध्य महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक
येलो अलर्ट: पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और बिहार समेत 12 राज्य
इन अलर्ट्स का मतलब है कि आने वाले दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
अमरनाथ यात्रा पर असर, हाईवे बंद
लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण Jammu Srinagar Highway को बंद कर दिया गया है। इसके चलते Amarnath Yatra को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
प्रशासन अलर्ट पर, लोगों से सावधानी बरतने की अपील
राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें, नदी-नालों के पास न जाएं और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष
देशभर में मानसून का यह तीखा असर आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। प्रशासन की तैयारियों के साथ-साथ आम जनता की जागरूकता भी इस प्राकृतिक आपदा से निपटने में अहम भूमिका निभाएगी।