रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने अस्थायी (तदर्थ/एडहॉक) कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने लंबे समय तक सेवा दी है, तो केवल उसके अस्थायी पद पर होने के आधार पर उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि दशकों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को पेंशन का लाभ मिलना चाहिए। अदालत ने माना कि लंबे समय तक कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ केवल नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर भेदभाव उचित नहीं है।
क्या था मामला?
यह मामला परमेश्वर शाह द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें पेंशन का लाभ दिया जाए, क्योंकि उन्होंने लंबे समय तक सेवा दी है।
याचिका पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे।
याचिकाकर्ता की ओर से क्या दलील दी गई?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सौरभ शेखर ने अदालत को बताया कि पेंशन नियमों के अनुसार यदि कोई तदर्थ या अस्थायी कर्मचारी 15 वर्ष से अधिक समय तक सेवा देता है, तो उसे पेंशन का लाभ दिया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्षों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को केवल इसलिए पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनकी नियुक्ति स्थायी नहीं थी।
राज्य सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने दलील दी कि जो कर्मचारी स्थायी प्रतिष्ठान का हिस्सा नहीं हैं, वे मौजूदा पेंशन नियमों के तहत पेंशन पाने के पात्र नहीं हैं।
सरकार का कहना था कि अस्थायी नियुक्ति और स्थायी नियुक्ति के नियम अलग-अलग हैं, इसलिए पेंशन का लाभ केवल नियमित कर्मचारियों को मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पूर्व में दिए गए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अपना निर्णय सुनाया।
अदालत ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की पेंशन केवल इस आधार पर नहीं रोकी जा सकती कि वे एडहॉक या अस्थायी कर्मचारी थे।
फैसले का क्या हो सकता है असर?
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला झारखंड के उन अनेक अस्थायी कर्मचारियों के लिए राहत भरा साबित हो सकता है, जिन्होंने वर्षों तक सरकारी संस्थानों में सेवा दी है और पेंशन की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, प्रत्येक मामले में अंतिम निर्णय संबंधित सेवा नियमों, कर्मचारी की सेवा अवधि और अन्य कानूनी तथ्यों के आधार पर होगा।
कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो लंबे समय तक तदर्थ या अस्थायी आधार पर सरकारी विभागों में कार्यरत रहे हैं। अदालत का यह आदेश भविष्य में ऐसे मामलों के निपटारे में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
निष्कर्ष
झारखंड हाईकोर्ट का यह फैसला अस्थायी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। अदालत ने साफ किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने वर्षों तक सेवा दी है, तो केवल उसकी नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर पेंशन से वंचित करना उचित नहीं होगा। हालांकि, पेंशन का वास्तविक लाभ संबंधित नियमों और प्रत्येक मामले के तथ्यों के अनुसार तय होगा।