रांची: झारखंड में लंबे समय से लंबित सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर आखिरकार तस्वीर साफ हो गई है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए चार नामों के पैनल को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।
राज्य सरकार की ओर से भेजे गए जिन चार नामों को मंजूरी मिली है, उनमें अनुज कुमार सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक शामिल हैं। अब कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ये नियुक्तियां प्रभावी हो जाएंगी।
यह केवल चार पदों को भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि झारखंड में सूचना के अधिकार (RTI) व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्या है राज्य सूचना आयोग और इसकी भूमिका?
सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act), 2005 के तहत प्रत्येक राज्य में सूचना आयोग का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
जब किसी नागरिक को सरकारी विभागों से मांगी गई सूचना समय पर नहीं मिलती या सूचना देने से इनकार कर दिया जाता है, तो वह पहले विभागीय अपील और उसके बाद राज्य सूचना आयोग में अपील कर सकता है।
राज्य सूचना आयोग का मुख्य कार्य है:
- RTI अपीलों का निपटारा करना
- सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश देना
- सूचना देने में लापरवाही पर अधिकारियों पर जुर्माना लगाना
- पारदर्शिता को बढ़ावा देना
- नागरिकों के सूचना संबंधी अधिकारों की रक्षा करना
यानी यह संस्था सरकार और नागरिकों के बीच पारदर्शिता की एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है।
लंबे समय से खाली थे पद
झारखंड राज्य सूचना आयोग में कई पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए थे। आयोग में पर्याप्त संख्या में सूचना आयुक्त नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में अपील और शिकायतें लंबित होती जा रही थीं।
सूत्रों के अनुसार आयोग के समक्ष RTI से जुड़े कई मामलों का निपटारा महीनों और कई मामलों में वर्षों तक लंबित रहा। इससे आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
कई सामाजिक संगठनों और RTI कार्यकर्ताओं ने समय-समय पर आयोग में रिक्त पदों को भरने की मांग भी उठाई थी।
राज्यपाल की मंजूरी क्यों है महत्वपूर्ण?
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में चयन समिति द्वारा नामों की अनुशंसा के बाद राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है।
राज्यपाल की मंजूरी मिलने का अर्थ है कि चयन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक चरण पूरा हो चुका है। अब केवल विभागीय अधिसूचना जारी होना बाकी है।
राज्यपाल के प्रधान सचिव नितिन कुलकर्णी ने इस संबंध में राज्य सरकार को आधिकारिक सूचना भेज दी है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देने का रास्ता खुल गया है।
कौन हैं नियुक्ति के लिए स्वीकृत चार नाम?
1. अनुज कुमार सिन्हा
अनुज कुमार सिन्हा झारखंड के जाने-माने पत्रकार और लेखक रहे हैं। प्रशासनिक और सामाजिक विषयों पर उनकी गहरी समझ मानी जाती है।
2. तनुज खत्री
तनुज खत्री प्रशासनिक अनुभव और सरकारी कार्यप्रणाली की समझ रखने वाले व्यक्तियों में गिने जाते हैं।
3. अमूल नीरज खलखो
अमूल नीरज खलखो का नाम भी आयोग की कार्यक्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से चयनित पैनल में शामिल किया गया है।
4. शिवपूजन पाठक
शिवपूजन पाठक का नाम भी राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पैनल में शामिल था, जिसे अब राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है।
इन चारों नियुक्तियों से आयोग में अनुभव और विविध दृष्टिकोण का समावेश होने की उम्मीद जताई जा रही है।
RTI व्यवस्था पर क्या होगा असर?
1. लंबित मामलों का तेजी से निपटारा
नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के बाद सबसे बड़ा फायदा लंबित मामलों के निपटारे में देखने को मिल सकता है।
वर्तमान में कई मामलों की सुनवाई लंबित है। अतिरिक्त आयुक्तों के आने से सुनवाई की संख्या बढ़ेगी और मामलों का निपटारा तेजी से होगा।
2. नागरिकों को समय पर सूचना
RTI कानून का मूल उद्देश्य नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराना है। आयोग की क्षमता बढ़ने से लोगों को न्याय मिलने में कम समय लगेगा।
3. सरकारी जवाबदेही में वृद्धि
जब सूचना आयोग प्रभावी तरीके से काम करता है तो सरकारी विभागों पर भी समय पर सूचना उपलब्ध कराने का दबाव बढ़ता है। इससे जवाबदेही मजबूत होती है।
4. पारदर्शिता को मिलेगा बढ़ावा
लोकतंत्र में पारदर्शिता और सुशासन के लिए सूचना आयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। नई नियुक्तियां इस दिशा में सकारात्मक कदम मानी जा रही हैं।
RTI कार्यकर्ताओं की क्या है राय?
RTI कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल नियुक्तियां ही पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि आयोग को आवश्यक संसाधन, तकनीकी सुविधाएं और पर्याप्त स्टाफ भी उपलब्ध कराना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयोग नियमित रूप से सुनवाई करे और लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष अभियान चलाए तो आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
झारखंड में RTI की स्थिति
झारखंड में RTI कानून का व्यापक उपयोग होता रहा है। नागरिक सरकारी योजनाओं, नियुक्तियों, विकास कार्यों, भूमि मामलों और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के लिए RTI का सहारा लेते हैं।
हालांकि कई बार सूचना प्राप्त करने में देरी और अपीलों के लंबित रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में आयोग को मजबूत बनाना समय की मांग मानी जा रही थी।
क्या कहते हैं प्रशासनिक विशेषज्ञ?
प्रशासनिक मामलों के जानकारों के अनुसार सूचना आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में “वॉचडॉग” की भूमिका निभाता है।
यदि आयोग मजबूत और सक्रिय रहता है तो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने, प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने और जनता के अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चार नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति झारखंड में सुशासन और पारदर्शिता को मजबूती प्रदान कर सकती है।
अब आगे क्या?
राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब अगला कदम कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी करना है।
अधिसूचना जारी होते ही चारों नाम आधिकारिक रूप से सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त माने जाएंगे और वे अपने कार्यभार का निर्वहन शुरू कर सकेंगे।
निष्कर्ष
झारखंड में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को मिली मंजूरी केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राज्य में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने से राज्य सूचना आयोग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और RTI से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा जारी की जाने वाली अंतिम अधिसूचना पर टिकी हैं, जिसके बाद झारखंड को चार नए सूचना आयुक्त मिल जाएंगे और सूचना आयोग एक नई ऊर्जा के साथ काम करता दिखाई देगा।