Jharkhand Rajya Sabha Election: राज्यसभा चुनाव आमतौर पर शांतिपूर्ण और संख्या आधारित माने जाते हैं, लेकिन इस बार झारखंड में होने वाला चुनाव कई मायनों में अलग नजर आ रहा है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर खींचतान, विपक्ष की रणनीति और निर्दलीय उम्मीदवार की एंट्री ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
18 जून को झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान होना है। इनमें एक सीट JMM संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हुई है, जबकि दूसरी सीट BJP के दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के कारण खाली हो रही है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राज्यसभा चुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस ने अचानक अपने राष्ट्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित कर दिया। कांग्रेस का मानना था कि वह INDIA गठबंधन की बड़ी सहयोगी पार्टी है, इसलिए एक सीट पर उसका दावा स्वाभाविक है।
लेकिन कांग्रेस की घोषणा के बाद JMM के भीतर असंतोष की खबरें सामने आईं। पार्टी नेताओं का कहना था कि कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित करने से पहले JMM नेतृत्व से पर्याप्त चर्चा नहीं की। इसके बाद JMM ने अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बैजनाथ राम को उम्मीदवार घोषित कर राजनीतिक संदेश दिया कि राज्य की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
हालांकि बाद में गठबंधन धर्म को ध्यान में रखते हुए JMM ने केवल एक उम्मीदवार उतारने का फैसला किया, जिससे कांग्रेस के लिए रास्ता आसान होता दिखाई दिया।
कौन हैं बैजनाथ राम?
बैजनाथ राम झारखंड की राजनीति में दलित चेहरे के रूप में पहचाने जाते हैं। वे पहले BJP में थे और 2019 विधानसभा चुनाव से पहले JMM में शामिल हुए थे। वे Latehar सीट से कई बार विधायक रह चुके हैं और राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे JMM के उपाध्यक्ष हैं।

कौन हैं प्रणव झा?
प्रणव झा कांग्रेस संगठन में लंबे समय से पर्दे के पीछे रणनीति बनाने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के भरोसेमंद सहयोगी माने जाते हैं। पहली बार वे प्रत्यक्ष रूप से चुनावी राजनीति के बड़े मैदान में उतर रहे हैं।

BJP ने क्यों उतारा गौरव वल्लभ?
BJP जानती है कि विधानसभा में उसके पास बहुमत नहीं है, लेकिन दूसरी सीट पर मुकाबला रोचक बनाया जा सकता है। गौरव वल्लभ राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का चर्चित चेहरा हैं और आर्थिक मुद्दों पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। BJP चाहती है कि यदि सत्ता पक्ष में कहीं भी क्रॉस वोटिंग या असंतोष पैदा हो तो उसका फायदा उठाया जा सके।

परिमल नाथवानी की एंट्री क्यों महत्वपूर्ण?
राज्यसभा चुनाव का सबसे रोचक पहलू परिमल नाथवानी का मैदान में उतरना है।
नाथवानी पहले भी झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनकी पहचान ऐसी शख्सियत के रूप में है जिनके संबंध लगभग सभी दलों के नेताओं से अच्छे माने जाते हैं। यही कारण है कि उनकी उम्मीदवारी को केवल प्रतीकात्मक नहीं माना जा रहा।
यदि चुनाव में क्रॉस वोटिंग होती है तो नाथवानी कई समीकरण बिगाड़ सकते हैं।

राज्यसभा चुनाव का गणित क्या है?
झारखंड विधानसभा में कुल 81 निर्वाचित सदस्य हैं।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक वोट का फॉर्मूला होता है:
(कुल विधायक ÷ (खाली सीटें + 1)) + 1
झारखंड में:
81 ÷ (2+1) = 27
27 + 1 = 28
अर्थात किसी उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता वोट चाहिए।
वर्तमान में किस पार्टी के पास कितने विधायक?
वर्तमान विधानसभा की स्थिति लगभग इस प्रकार है:
| पार्टी | विधायक |
|---|---|
| JMM | 27 |
| BJP | 24 |
| Congress | 16 |
| RJD | 4 |
| CPI(ML) | 2 |
| AJSU | 1 |
| NCP | 1 |
| JVM/अन्य | 1 |
| निर्दलीय | 5 |
| कुल | 81 |
राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार इनमें कुछ बदलाव या समर्थन की स्थिति बदल सकती है, लेकिन चुनावी गणित मोटे तौर पर इसी आधार पर तय हो रहा है।
INDIA गठबंधन का गणित
यदि JMM, कांग्रेस, RJD और CPI(ML) साथ रहते हैं तो संख्या कुछ इस प्रकार बनती है:
- JMM – 27
- Congress – 16
- RJD – 4
- CPI(ML) – 2
कुल = 49 विधायक
49 वोट दो उम्मीदवारों को सीधे जिताने के लिए पर्याप्त नहीं हैं क्योंकि दो उम्मीदवारों को लगभग 56 वोट चाहिए।
यही वजह है कि गठबंधन को निर्दलीयों और छोटे दलों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है।
BJP का गणित
BJP के पास:
- BJP – 24
- AJSU – 1
कुल लगभग 25 वोट का आधार माना जा रहा है।
एक सीट जीतने के लिए भी उसे कम से कम 3 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी।
यहीं से निर्दलीय विधायक और छोटे दलों का महत्व बढ़ जाता है।
किसके पास हैं ‘किंगमेकर’ वोट?
इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय विधायकों और छोटे दलों के वोटों की है।
इनमें शामिल हैं:
- NCP विधायक
- निर्दलीय विधायक
- छोटे क्षेत्रीय दलों के सदस्य
यदि इनमें से कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग करते हैं तो पूरा चुनावी समीकरण बदल सकता है।
क्या क्रॉस वोटिंग की संभावना है?
राज्यसभा चुनाव में मतदान गुप्त नहीं बल्कि ओपन बैलेट सिस्टम के तहत होता है। इसलिए दलों के लिए अपने विधायकों पर नजर रखना आसान होता है।
फिर भी झारखंड का राजनीतिक इतिहास बताता है कि राज्यसभा चुनावों में कई बार अप्रत्याशित घटनाएं हुई हैं। यही कारण है कि सभी दल अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं।
सबसे मजबूत स्थिति में कौन?
वर्तमान परिस्थितियों में:
पहली सीट
बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है क्योंकि JMM अकेले ही 27 विधायकों के साथ कोटा के बेहद करीब है और गठबंधन का समर्थन उन्हें आसानी से मिल सकता है।
दूसरी सीट
यहीं असली लड़ाई है।
प्रणव झा, गौरव वल्लभ और परिमल नाथवानी के बीच राजनीतिक रणनीति, गठबंधन प्रबंधन और अतिरिक्त वोट जुटाने की प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है।
चुनाव का सबसे बड़ा सवाल
झारखंड राज्यसभा चुनाव अब केवल दो सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह INDIA गठबंधन की एकजुटता, JMM की राजनीतिक ताकत, कांग्रेस की संगठनात्मक पकड़ और BJP की रणनीतिक क्षमता की भी परीक्षा बन गया है।
यदि गठबंधन पूरी तरह एकजुट रहता है तो दोनों सीटें उसके खाते में जा सकती हैं। लेकिन यदि कहीं भी असंतोष, क्रॉस वोटिंग या निर्दलीय विधायकों का रुख बदलता है, तो दूसरी सीट का मुकाबला बेहद रोमांचक हो सकता है।
18 जून को होने वाला मतदान केवल राज्यसभा की दो सीटों का फैसला नहीं करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि झारखंड की राजनीति में असली शक्ति केंद्र कौन है और 2029 की बड़ी राजनीतिक लड़ाई के लिए किस दल की जमीन सबसे मजबूत है।
(यह लेख The Varta के लिए विशेष राजनीतिक विश्लेषण के रूप में तैयार किया गया है।)