रांची: झारखंड के राज्य विश्वविद्यालयों की वित्तीय व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य सरकार ने “स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड” का मसौदा तैयार कर लिया है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों की वित्तीय प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों के अलग-अलग विभागों, अंगीभूत कॉलेजों, परीक्षा शाखाओं और विभिन्न योजनाओं के नाम पर संचालित बैंक खातों की व्यवस्था समाप्त कर दी जाएगी। इसके स्थान पर पूरे विश्वविद्यालय की राशि सिंगल नोडल अकाउंट (Single Nodal Account – SNA) में रखी जाएगी।
ई-समर्थ पोर्टल से होगा पूरा वित्तीय संचालन
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बजट तैयार करने, भुगतान, लेखांकन, बैंक मिलान, ऑडिट और वित्तीय रिपोर्टिंग का पूरा काम ई-समर्थ पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। नकद भुगतान और मैनुअल वाउचर की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त कर दी जाएगी। प्रत्येक वित्तीय लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे किसी भी समय उसकी जांच की जा सकेगी।
हर भुगतान के लिए होगी तीन स्तर की मंजूरी
नई प्रणाली में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए मेकर, चेकर और अप्रूविंग अथॉरिटी की तीन-स्तरीय स्वीकृति प्रक्रिया लागू की जाएगी। किसी भी भुगतान को जारी करने से पहले इन तीनों स्तरों से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
यदि किसी विभाग को स्वीकृत बजट से अधिक खर्च करना होगा, तो उसे सक्षम प्राधिकारी से विशेष अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा आकस्मिक परिस्थितियों से निपटने के लिए कंटिंजेंसी फंड बनाने का भी प्रावधान रखा गया है।
हर महीने समय पर मिलेगा वेतन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों को प्रत्येक महीने की तीन तारीख तक वेतन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। इससे वेतन भुगतान में होने वाली देरी पर रोक लगेगी और वित्तीय प्रबंधन अधिक सुव्यवस्थित होगा।
90 से 365 दिनों में लागू होगी नई व्यवस्था
अध्यादेश लागू होने के बाद राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को 90 से 365 दिनों के भीतर अपने पुराने बैंक खातों को बंद कर उनमें जमा राशि सिंगल नोडल अकाउंट में स्थानांतरित करनी होगी। इसके बाद सभी वित्तीय लेनदेन केवल नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ही किए जाएंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केंद्र या राज्य सरकार से किसी विशेष योजना अथवा उद्देश्य के लिए प्राप्त अनुदान का उपयोग केवल उसी कार्य के लिए किया जा सकेगा, जिसके लिए राशि स्वीकृत की गई है।
वित्तीय अनियमितताओं पर लगेगा अंकुश
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से वर्षों से चली आ रही बिखरी हुई वित्तीय प्रणाली को एकीकृत किया जा सकेगा। इससे सरकारी अनुदानों के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी, ऑडिट संबंधी आपत्तियां कम होंगी और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
वर्तमान में राज्य के कई विश्वविद्यालयों में अलग-अलग मदों के लिए दर्जनों बैंक खाते संचालित हो रहे हैं। कई खाते लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण निष्क्रिय (डेड) हो चुके हैं। वहीं, कुछ विश्वविद्यालयों में अग्रिम राशि का वर्षों तक समायोजन नहीं होने से ऑडिट में लगातार आपत्तियां दर्ज होती रही हैं। नई व्यवस्था इन समस्याओं का स्थायी समाधान मानी जा रही है।
उच्च शिक्षा में डिजिटल गवर्नेंस की ओर बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंगल नोडल अकाउंट और ई-समर्थ पोर्टल आधारित वित्तीय प्रणाली लागू होने से झारखंड के राज्य विश्वविद्यालयों में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूती मिलेगी। इससे वित्तीय पारदर्शिता बढ़ेगी, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन होगा और विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बन सकेगी।
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