रांची: राजधानी रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मेला परिसर में लगने वाले प्रसिद्ध रथ मेला की नीलामी इस वर्ष नया इतिहास रच गई है। वर्ष 2026 के लिए मेले की नीलामी 2 करोड़ 27 लाख रुपये में हुई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बोली मानी जा रही है। इससे पहले किसी भी वर्ष मेले की नीलामी इतनी ऊंची राशि पर नहीं हुई थी।
रथ मेला झारखंड के सबसे बड़े धार्मिक और व्यावसायिक आयोजनों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के रथ दर्शन और मेले का आनंद लेने पहुंचते हैं। ऐसे में मेले की नीलामी राशि में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सीधा असर वहां दुकान लगाने वाले व्यापारियों और छोटे व्यवसायियों पर पड़ने की संभावना है।
पिछले वर्षों की नीलामी पर एक नजर
| वर्ष | नीलामी राशि |
|---|---|
| 2026 | ₹2 करोड़ 27 लाख |
| 2025 | ₹51 लाख |
| 2024 | ₹1 करोड़ 92 लाख |
| 2023 | ₹75 लाख |
आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2026 की बोली ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। खासकर वर्ष 2025 की तुलना में इस बार नीलामी राशि में चार गुना से भी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है।
दुकानदारों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव
नीलामी राशि में भारी बढ़ोतरी का असर मेले में दुकान लगाने वाले व्यापारियों पर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि ठेकेदार द्वारा चुकाई गई बड़ी राशि की भरपाई के लिए दुकानों का किराया बढ़ाया जा सकता है। इससे छोटे दुकानदारों को अधिक शुल्क देना पड़ सकता है, जिसका असर मेले में बिकने वाले सामान की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच कारोबार की बड़ी उम्मीद
हालांकि नीलामी राशि रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से यह भी संकेत मिलता है कि इस बार मेले में कारोबार की संभावनाएं काफी बेहतर मानी जा रही हैं। हर वर्ष रथ मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देता है। बड़ी संख्या में लोग यहां खरीदारी, मनोरंजन और पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लेने पहुंचते हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि रिकॉर्ड नीलामी के बाद इस वर्ष आयोजित होने वाला रथ मेला श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए कितना सफल साबित होता है तथा बढ़ी हुई लागत का प्रभाव बाजार और आम लोगों पर किस तरह पड़ता है।