नई दिल्ली: कक्षा 9वीं की नई कला (आर्ट्स) पुस्तक में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध ‘डांसिंग गर्ल’ मूर्ति की तस्वीर को बदलने को लेकर उठे विवाद के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपना फैसला बदल दिया है। विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सोशल मीडिया पर हुई तीखी आलोचना के बाद अब NCERT ने किताब में मूर्ति की मूल और बिना किसी बदलाव वाली तस्वीर को शामिल करने का निर्णय लिया है।
इस फैसले को शिक्षा और कला जगत में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह मामला लगातार चर्चा में था और कई विशेषज्ञों ने ऐतिहासिक धरोहर की तस्वीर में बदलाव पर सवाल उठाए थे।
क्या था पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत कक्षा 9वीं की नई आर्ट्स पुस्तक ‘मधुरिमा’ से हुई। पुस्तक के पहले अध्याय ‘हिस्ट्री ऑफ आर्ट्स’ में सिंधु घाटी सभ्यता की प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा ‘डांसिंग गर्ल’ की तस्वीर प्रकाशित की गई थी।
आलोचकों का आरोप था कि पुस्तक में प्रकाशित तस्वीर के ऊपरी हिस्से को धुंधला (शेड) कर दिया गया था, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि प्रतिमा को कपड़े पहनाए गए हैं। जबकि मूल प्रतिमा अपने ऐतिहासिक स्वरूप में बिना किसी बदलाव के जानी जाती है।
विशेषज्ञों ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मूर्ति पिछले कई दशकों से इतिहास, पुरातत्व और कला से जुड़ी पुस्तकों में अपने वास्तविक रूप में प्रकाशित होती रही है। ऐसे में उसके मूल स्वरूप से छेड़छाड़ उचित नहीं है।
NCERT ने मानी गलती
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने मामले को गंभीरता से लिया और स्पष्ट किया कि ऑनलाइन उपलब्ध पुस्तक के पीडीएफ संस्करण में तस्वीर को तुरंत बदला जाएगा। अब छात्रों को डिजिटल संस्करण में मूर्ति की असली तस्वीर ही दिखाई देगी।
हालांकि जो पुस्तकें पहले ही छप चुकी हैं, उनमें तत्काल बदलाव संभव नहीं है। लेकिन NCERT ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में जब भी इस पुस्तक का नया संस्करण या नया प्रिंट बैच प्रकाशित होगा, उसमें मूल तस्वीर को ही शामिल किया जाएगा।
किसी एजेंडे से इनकार
NCERT अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूर्ति की तस्वीर को शेड करने या उसमें बदलाव करने के पीछे कोई विशेष एजेंडा नहीं था। संस्था का कहना है कि मामला सामने आने के बाद इसकी जांच संबंधित कला और शिक्षा विशेषज्ञों को सौंप दी गई है।
अधिकारियों के अनुसार यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के चित्रण में तथ्यात्मक सटीकता बनी रहे।
विशेषज्ञों ने उठाए थे सवाल
इतिहासकारों और कला विशेषज्ञों का कहना था कि ‘डांसिंग गर्ल’ केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और कला का महत्वपूर्ण प्रतीक है। लगभग 4,000 वर्ष पुरानी यह कांस्य प्रतिमा सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे चर्चित कलाकृतियों में से एक मानी जाती है।
विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि छात्रों को इतिहास और कला की जानकारी उनके मूल स्वरूप में ही दी जानी चाहिए, ताकि वे अतीत को सही संदर्भ में समझ सकें।
शिक्षा जगत में छिड़ी बहस
इस विवाद ने एक बड़ी बहस को भी जन्म दिया है कि क्या ऐतिहासिक कलाकृतियों को आधुनिक सामाजिक दृष्टिकोण के अनुरूप बदलना उचित है या उन्हें उनके मूल स्वरूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
कई शिक्षाविदों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों का उद्देश्य इतिहास और कला को तथ्यात्मक रूप से प्रस्तुत करना है, इसलिए किसी भी प्रकार का दृश्य परिवर्तन छात्रों की समझ को प्रभावित कर सकता है।
अब क्या होगा?
NCERT के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले संस्करणों में ‘डांसिंग गर्ल’ की मूल तस्वीर ही प्रकाशित होगी। संस्था ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री और चित्रों की समीक्षा को और अधिक सावधानीपूर्वक किया जाएगा।
फिलहाल इस फैसले को उन विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिन्होंने ऐतिहासिक कलाकृतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में प्रस्तुत करने की मांग उठाई थी।